Aateet aur Bhavishya ka Vartman Arya Samaj |
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By: Chamanlal Rampal
Publisher: Chaman Prakashan
Language: Hindi
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Overview
Language: Hindi
Subject Categories
HIS017000 – History / Asia / India & South Asia
REL032010 – Religion / Hinduism / History
Geographical Rights
Worldwide
Description
अतीत और भविष्य का वर्तमान आर्य समाज' से भावार्थ है- जिस प्रकार अतीत का संरक्षक और भविष्य का शिल्पी वर्तमान' होता है उसी प्रकार भारत के गौरवमय वैदिक अतीत तथा गौरवयुक्त वैदिक भविष्य का दावेदार आर्य समाज है। अर्थात आर्य समाज विश्वस्त धारणा रखता है कि जो वैदिक धर्म-संस्कृति भारत के गौरवमय अतीत का आधार थी, वही वैदिक धर्म-संस्कृति भविष्य में भी भारत के पुन: विश्व-गुरू गौरव का आधार बन संसार के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। अत: आर्य समाज उसी आर्य सत्य सनातन वैदिक संस्कृति की वारिस है।
वैदिक धर्म-संस्कृति-क्या है?
वह मानव जीवन पद्धति है जो पावन वेदों के र्इश्वरीय ज्ञान से महान तपी-तपस्वी ऋषियों द्धारा उपजी, तथा विश्व के प्राणी-मात्र के कल्याण के लिये विधमान है। अत: जिसमें वसुधैव कुटुम्बकम की भावना और सर्वे भवन्तु सुखिन: की कामना निहित है। वैदिक संस्कृति ही संसार की सर्वप्रथम मूल मानव-संस्कृति है।............किन्तु उसके स्वरूप को युगों के परिवर्तन और समय के प्रदूषण ने धूमिल कर दिया है। फलत: मानव-समाज में अनेक अंधविश्वासों व अमानवी कुप्रथाओं ने अनेक मत-मतान्तरों के रूप में जन्म ले लिया है।
आर्य समाज उसी स्वच्छ सनातन वैदिक मानव संस्कृति को यथा स्वरूप निखारना चाहता है जिसके अनुकरण से विश्व में कुटुम्ब-अपनत्वता भावना जागती है और भार्इचारा व मानव समानता की स्थापना होती है तथा सभी वाद मिट एक र्इश्वरवाद द्वारा, विश्व में सुख शानित का युग निर्माण हो सकता है, जो वर्तमान काल की अनिवार्य आवश्यकता है।
Author Biodata
Chamanlal Rampal |